बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से काफी पहले ही सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि मायावती इस बार कांशीराम वाले पुराने अंदाज में कार्यकर्ताओं के बीच लौटने की तैयारी कर चुकी हैं।
मायावती 6 दिसंबर को नोएडा में एक बड़ी रैली करने जा रही हैं। यह दिन बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है, इसलिए यह रैली न सिर्फ श्रद्धांजलि होगी, बल्कि आगामी राजनीतिक हलचलों का भी संकेत मानी जा रही है। इस रैली के जरिए वह विरोधियों को यह संदेश देने की कोशिश करेंगी कि बसपा का कैडर आज भी उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
जमीन पर उतरने की रणनीति
2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद से मायावती की राजनीतिक सक्रियता धीरे-धीरे कम होती गई थी, जिसका असर पार्टी के वोट शेयर (2022 में 13% और 1 सीट) पर दिखा था। ऐसे में 2027 का चुनाव बसपा के लिए अस्तित्व की लड़ाई जैसा माना जा रहा है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, मायावती अब जमीन पर ज्यादा समय बिताने की तैयारी में हैं:
- नाइट कैंप: वह यूपी के सभी 18 मंडलों में नाइट कैंप करेंगी। इससे पहले उन्होंने ऐसा कैंपेन सिर्फ संस्थापक कांशीराम के साथ किया था।
- कार्यकर्ताओं के बीच: नाइट कैंप का मतलब सिर्फ बैठकें नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के साथ दिन-रात गुजारना, उनकी समस्याएं समझना और उनमें जोश भरना होगा।
- रैलियों का सिलसिला: पार्टी की रणनीति है कि 2026 के फरवरी-मार्च से ही लगातार रैलियों का सिलसिला शुरू कर दिया जाए ताकि कोई इलाका उनकी पहुंच से न छूटे।
पार्टी की रणनीति घर-घर संपर्क अभियान पर जोर देने की है, ताकि बसपा का मूल वोट आधार फिर से मजबूत हो सके। नोएडा की यह रैली आने वाले महीनों में बसपा की सक्रिय राजनीति का शुरुआती संकेत मानी जा रही है।













